नई दिल्ली, 30 अगस्त
बीटा ब्लॉकर्स, जो पिछले 40 वर्षों से दिल के दौरे के बाद मानक उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है, दिल के दौरे के रोगियों के लिए कोई लाभ नहीं पहुँचा सकता है और कुछ महिलाओं में मृत्यु का जोखिम बढ़ा सकता है, शनिवार को हुए एक अध्ययन के अनुसार, जिसमें मानक उपचार पद्धति में बदलाव की आवश्यकता बताई गई है।
बीटा ब्लॉकर्स आमतौर पर दिल के दौरे सहित कई हृदय संबंधी स्थितियों के लिए निर्धारित की जाने वाली दवाएं हैं। यह उन रोगियों के लिए कोई नैदानिक लाभ प्रदान नहीं करती है जिन्हें बिना किसी जटिलता के मायोकार्डियल इन्फार्क्शन हुआ हो और हृदय की कार्यक्षमता बरकरार हो।
मैड्रिड में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत और द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन तथा यूरोपियन हार्ट जर्नल में एक साथ प्रकाशित इस अध्ययन से पता चला है कि बीटा ब्लॉकर्स से इलाज कराने वाली महिलाओं में दवा न लेने वाली महिलाओं की तुलना में मृत्यु, दिल का दौरा पड़ने या हृदय गति रुकने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम अधिक था।
हालांकि, पुरुषों में यह बढ़ा हुआ जोखिम नहीं था।